Saturday, 30 June 2012

कृपा इसे न पढ़े

                                                            
                                                             
कृपा इसे न पढ़े
साथियो ,नमस्कार आज मेरी छुट्टी का दिन हे मेरे पास कोई काम नहीं हे इसलिए सुबह देर तक सोता रहा |और जब आँख खुली तो घडी की तरफ  देखा जेसे मुह चिढाकर कह रही हो की आलसी अभी तो सिर्फ  8 बजे हे अब पुरे दिन क्या करेगा |में उठ कर फ्रेश हुआ नास्ता करा और शौचा की अब क्या करे |जब कुछ समझ नहीं आया तो   सोचा की चलो कुछ लिखा जाये |अब मन में ख्याल आया की क्या लिखा जाये काफी शोच -विचार के बाद  कुछ भी समझ नहीं आया तो बस ऐसेही लिखने बैठ गया |अब समय तो पास करना ही हें इसलिय मेने आपसे कहा की इसे न पढ़े क्यूंकि मुझे तो अपना समय पास करना हे मगर आप क्यों अपना वक्त ख़राब करें |में कोई लेखक तो हूँ नहीं की किसी खास विषय पर कुछ लिख डालू और आप उससे कुछ सीख पाए इसलिए में आप से फिर कहता हूँ की इसे न पढ़े |अच्छा अब आप ही बताये की मेरे लाख मना करने के बाद भी आप इसे पढ़े जा रहे हे  तो क्या आप को मेरे लेख (पता नहीं की हें भी या नहीं ) में कुछ खास नज़र आया  - नहीं आया न ,में तो पहले ही कह रहा था की  कुछ नहीं मिलेगा |अरे मिलेगा कहाँ से जब मुझे कुछ लिखना ही नहीं आता |में तो युही  अपना वक्त पास कर रहा हूँ | आँख उठा कर देखा तो घडी में 10 बजे थे | मन में ख्याल आया की चलो आज लिखने की कोशिश में  २ घंटे तो पास हुए |मगर फिर सोचा की मेरे तो 2 घंटे पास हो गए मगर आप के तो ख़राब हो गए पर में क्या करू मेने तो आप को पहले ही मना करा था की इसे न पढ़े | मगर आप तो बस वही हो जितना मना करो उतना ही करेगे ओर बाद में मुझे गाली देंगे |अब में समझ गया की आप मेरी बात नहीं मानेगे और अब तो ऐसा लग रहा हें की आप लोगो के साथ -साथ मेरा भी वक्त ख़राब हो रहा हे  इसलिए  में ही लिखना बंद करता हूँ | नमस्कार

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